तुम वक़्त हो एक दिन का
हम दोनों में एक फर्क है,
मैं जीवन हूँ प्रतिदिन का,
तुम वक़्त हो एक दिन का …
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हम दोनों में एक फर्क है,
मैं जीवन हूँ प्रतिदिन का,
तुम वक़्त हो एक दिन का …
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हम कविता चुराते है,
गिरती हुई पलकों से
जुबा की खामोशी और
आँखों की बोली से,
हम कविता चुराते है. Read More »
कभी कभी,
बेवज़ह बातें हो जाती हैं,
जब दिल करता है जुड़ने का,
एक जरूरत निकल आती है
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जब दो दिलों के बीच भावनाएं एक सीमा से निकलती है तो बातों का सिलसिला शुरू होता है. कविता “आओ बात करें ” उसी का चित्रण है.
कुछ ऐसे रिश्ते होते है जो न आगे बढ़ते हैं और न पीछे हटते हैं. ऐसे रिश्ते एक निश्चित दूरी पर स्थिर बने रहते है. ” समान्तर रेखाएं ” उन्ही रिश्तो का चित्रण है.
दो व्यक्तियों के बीच एक प्राकृतिक रिश्ता बन जाता है किन्तु समाज इसकी स्वीकृति नहीं देता. प्रेमी रिश्तों की बंदिश से निकालने के लिए जीवन भर फडफडाते रहते है.
कुछ लोग बचपन और जवानी में ही वैराग्य की ओर मुड़ जाते हैं. उन्हें हिदायत देती यह कविता कहती है
” अभी, उम्र से आगे क्यों हो , थोड़ा पीछे रहा करो. “
बहुत मुश्किल होता है, कुछ कविताओं को समझ पाना. विशेषकर कुछ उन, महान कवियों की रचनाएं जिनका भाव सिर्फ वही समझते है.
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