कल के लिए परेशान हूं
मै आज के लिए नहीं, कल के लिए परेशान हू.
वो कल, जब बुढापा बन कर आएगा,
मुझे मेरी जवानी का एक तस्वीर दिखयेगा..
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मै आज के लिए नहीं, कल के लिए परेशान हू.
वो कल, जब बुढापा बन कर आएगा,
मुझे मेरी जवानी का एक तस्वीर दिखयेगा..
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कुछ सामान छोड़ जाओ,
मैं जी लूंगी उसके आस पास
रिश्तों को सांसों की जरूरत होती है,
वो सांसें उन सामानों से मिलती रहेगी..
मेरा फ़िसल जाना, उस बारिश का करतूत था. हवा का रूख, जमी की ढलान और भीगी सड़कें, सब एक साथ थे. बरसात पर एक रोमांचक कविता .
अगर बात नही कर सकते तो कोई बात नहीं,
कुछ शब्द छोड़ जाओ,
मैं उन शब्दों से, बात कर लूँगी.
मैं खुद को तुमसे जोड़ लूँगी Read More »
तुम एक ग्रंथ हो, जहां से कहानियां बहुत निकलतीं हैं. मैं उन कहानियों में उलझ जाता हूँ, तुम्हारे घर का रास्ता भूल जाता हूँ ,
इन अक्षरों में तेरा
अक्स नज़र आता है,
दूर ही सही हर लम्हा
मेरे करीब नज़र आता है.
तेरा अक्स नजर आता है Read More »
व्यक्ति के भविष्य का बदलाव उसके वर्तमान दिन के बदलाव पर निर्भर करता है. यह जानते हुए भी हम अपनी वर्तमान को बदल नहीं पाते है. इसका वजह क्या है.
बंद आँखों और बेतरतीब बदन देखकर,
वह समझता है
मैं सो रही हूँ.
वह समझता है, मैं सो रही हूँ … Read More »