क्या करोगे नववर्ष पाकर ?
कुछ लोग नववर्ष पर पागल हो जाते है. उन्हें भ्रम होता है एक नववर्ष पाने का और मुझे अफ़सोस होता है एक और वर्ष खोने का. हर बार नव वर्ष पूछता है “क्या करोगे नवबर्ष पाकर ?”
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कुछ लोग नववर्ष पर पागल हो जाते है. उन्हें भ्रम होता है एक नववर्ष पाने का और मुझे अफ़सोस होता है एक और वर्ष खोने का. हर बार नव वर्ष पूछता है “क्या करोगे नवबर्ष पाकर ?”
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जिन्दगी छोटी है
इसके बीच में छुपी जवानी,
और भी छोटी है.
कभी संभल जाती है
कभी फिसल जाती है,
मुठ्ठी की रेत है यह,
आहिस्ते से फिसल जाती है.