शब्दों की उम्र
इन शब्दों की उम्र
हमारी उम्र से कही लम्बी है,
मनोभावों से निर्मित
शब्दों की ये श्रृंखला,
पहाड़ों से भी ऊची और
समंदर से गहरी है
इन शब्दों की उम्र
हमारी उम्र से कही लम्बी है,
मनोभावों से निर्मित
शब्दों की ये श्रृंखला,
पहाड़ों से भी ऊची और
समंदर से गहरी है
वो कल,
जो आज को खा रहा है,
सदियों से तड़पा रहा है,
उम्र को घटा रहा है,
जिन्दगी को दौड़ा रहा है
कब आयेगा ?
प्रतिदिन की जिंदगी को एक डायरी की पृष्ट से तुलना की गयी है और यह भी बताया गया है की इन पृष्ठों की संख्या असीमित नहीं, सिमित है.
सपनों की स्वतंत्रता एक कविता है जो यह बताती है कि व्यक्ति जिन भावनाओं को चेतन अवस्था में नहीं व्यक्त पाता वह सपने में व्यक्त हो जाती हैं .
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कुछ प्रश्न,
अनुत्तरित होते है,
शायद इसी में उनकी
महत्ता, कायम रहती है
सत्ता, जीवित रहती है
अस्तित्व सुरक्षित रहता है…
पराई होती जिंदगी एक कविता के रूप में व्यक्ति की मज़बूरी चित्रित करता है. व्यक्ति अपने लिए कुछ नहीं कर पाता . उसकी अपनी ही जिंदगी उसके वश में नहीं होती.
अक्सर गुजरा हुआ सुनहरा वक्त, वर्तमान परिदृश्य में संदेहित हो जाता है . यकीन नही होता कि वास्तव में वह सच था या झूठ. “कल आज और कल ” इसी को चित्रित कराती रचना है.
किसी खामोश चेहरा को ध्यान से देखिये. वह एक किताब नजर आएगा. खामोश चेहरा पर एक अर्थपूर्ण कविता .
आज फिर हम,
जिंदगी के उस मोड़ पर आये है,
जिंदगी का लेखा जोखा साथ लेकर आये है,
देखे तो सही,
क्या खोया और क्या पाए है ?
जिदगी का लेखा-जोखा Read More »