ऐ दिन
ऐ दिन,
आज सुबह ही तो खिले थे, तुम एक बच्चे की तरह.
दो पहर में मिले थे, किसी युवा की तरह.
शाम ढलते देखा था तुझे, बुजुर्गों की तरह.
अगर बात नही कर सकते तो कोई बात नहीं,
कुछ शब्द छोड़ जाओ,
मैं उन शब्दों से, बात कर लूँगी.
मैं खुद को तुमसे जोड़ लूँगी Read More »
तुम एक ग्रंथ हो, जहां से कहानियां बहुत निकलतीं हैं. मैं उन कहानियों में उलझ जाता हूँ, तुम्हारे घर का रास्ता भूल जाता हूँ ,
इन अक्षरों में तेरा
अक्स नज़र आता है,
दूर ही सही हर लम्हा
मेरे करीब नज़र आता है.
तेरा अक्स नजर आता है Read More »
व्यक्ति के भविष्य का बदलाव उसके वर्तमान दिन के बदलाव पर निर्भर करता है. यह जानते हुए भी हम अपनी वर्तमान को बदल नहीं पाते है. इसका वजह क्या है.
बंद आँखों और बेतरतीब बदन देखकर,
वह समझता है
मैं सो रही हूँ.
वह समझता है, मैं सो रही हूँ … Read More »
रविवार आने की उत्सुकता सबको रहती है. इस दिन सामान्यत मौज मस्ती और किसी से मिलाने का वादा होता है. लेकिन रुकिए. आज शनिवार है एक दिन और इंतज़ार कीजिये.
आँखें खुली होतीं है तो सामने होते हो, जब बंद होती हैं तो पलकों के अन्दर होते हो, जब अकेली होती हूँ तो शरारत करते हो. तुम चोर हो, चोरी करते हो.
तुम चोर हो, चोरी करते हो Read More »