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सफेद चादरों का सफ़र: भारतीय रेलवे के एसी कोच में हमेशा सफेद बेडरोल ही क्यों? जानिए पीछे की दिलचस्प वजह!

White bedrole Indian railway

हर बार जब आप भारतीय रेलवे के एसी कोच में चढ़ते हैं, वही सफेद चादरें आपका इंतज़ार करती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये हमेशा सफेद ही क्यों होती हैं  ?  इसके पीछे छुपा है एक दिलचस्प कारण  !

Indian railway white bedsheet

सफेद चादरों का सफ़र: भारतीय रेलवे के एसी कोच में सफेद बेडरोल ही क्यों? जानिए पीछे की पूरी कहानी !

भारतीय रेलवे की किसी ए सी क्लास में  जब आप यात्रा करते हैं, तो एक चीज़ कॉमन होती है: सफेद चादरें और तकिए के कवर। ये केवल संयोग नहीं, बल्कि सुविचारित नीति और मेंटेनेंस की दृष्टि से चुना गया रंग है । लेकिन क्यों ? आइए जानते हैं इस निर्णय के पीछे की परत-दर-परत वजहें ।


सफेद रंग का व्यावहारिक कारण – साफ-सफाई में सहूलियत.

सफेद चादरें गंदगी को तुरंत दिखा देती हैं । किसी भी दाग या धूल को नजरअंदाज करना मुश्किल होता है। इससे रेलवे स्टाफ को यह सुनिश्चित करना आसान होता है कि बेडरोल हर यात्रा के बाद धोया गया है या नहीं

इसके अलावा, सफेद कपड़े को ब्लीच करना और धोना आसान होता है, जिससे बार-बार उपयोग के बावजूद हाइजीन मेंटेन किया जा सकता है । इन चादरों की धुलाई हाई टेम्परेचर पर मेकेनाइज्ड लांड्री द्वारा की जाती है. ऐसे में रंगीन चादरों के स्वाभाविक रंग फेड हो सकते है और ब्लीच करने से भी रंग बदल सकता है. रंगीन चादरों के दाग धब्बे छुप सकते है. यात्रियों के मन में भी सफ़ेद रंग एक भरोसा और शांति का प्रतीक बन जाता है — ठीक वैसे ही जैसे अस्पताल और होटल में सफेद लिनेन प्रयोग किया जाता है।


क्या भारतीय रेलवे ने कभी रंगीन चादरों का प्रयोग किया ?

rangin kambal cover

कई यात्री सोचते हैं कि क्या भारतीय रेलवे ने कभी रंगीन चादरों का प्रयोग किया ?

हाँ—भारतीय रेलवे ने रंगीन लिनेन (खासतौर पर ब्लैंकेट कवर) पर काम किया है और हाल में पायलट भी शुरू किया है, पर बेडशीट सामान्यतः अब भी सफेद ही दी जाती हैं। आईये इस सन्दर्भ में कुछ और जानकारी प्राप्त करते है जो इस प्रकार है :

  1. 2015–2016:. रंगीन बेडरोल का विचार औपचारिक रूप से उठा था. रेलवे ने 2015 में सर्वे कराया जिसमें यात्रियों से रंगीन/प्रिंटेड शीट्स की पसंद पूछी गई थी. 2016 में “मल्टी-कलर बेडरोल” का ऐलान भी हुआ और यह कहा गया कि NIFT डिज़ाइन करेगा. पर इसका देश-भर में व्यापक क्रियान्वयन दर्ज नहीं मिलता.
  2. 2024:. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में राजधानी ट्रेनों में “रंगीन चादर” का ट्रायल बताए गए हैं, पर इसे पैन-इंडिया रोल-आउट के सबूत उपलब्ध नहीं हैं. इसे सीमित/स्थानीय ट्रायल मानना बेहतर है.
  3. 2025 की “रंगीन” पहल—ब्लैंकेट कवर:. अक्टूबर 2025 में रेलवे ने एसी कोचों में धुलने-योग्य “सांगानेरी प्रिंट” वाले रंगीन ब्लैंकेट कवर का पायलट शुरू किया है. शुरुआत जयपुर–आसारवा एक्सप्रेस से बताई गई है. उद्देश्य बेहतर हाइजीन और बेहतर लुक है. यह सफल रहा तो पूरे नेटवर्क में फैलाया जाएगा. ध्यान दें, यह “कवर/कंबल-कवर” हैं, बेडशीट नहीं.
  4. वर्तमान स्थिति—बेडशीट का रंग:. आधिकारिक नोटिस में बेडशीट के रंग बदलने का स्पष्ट आदेश नहीं है. प्रचलन अब भी सफेद ही है, जबकि ब्लैंकेट कवर रंगीन किए जा रहे हैं.

निष्कर्ष:.
• “रंगीन चादरें” कभी-कभार ट्रायल/विचार स्तर पर रही हैं, पर बड़े पैमाने पर लागू नहीं दिखतीं.
• 2025 में जो वास्तविक “रंगीन” पहल है, वह धुलने-योग्य, प्रिंटेड ब्लैंकेट कवर की है, न कि बेडशीट की.
• इसलिए अभी के लिए मानक बेडशीट का रंग सफेद ही हैं, जबकि ब्लैंकेट कवर रंगीन/प्रिंटेड किए जाने का प्रयास शुरू किया गया है.

लेकिन सफेद रंग अब भी मुख्य धारा में बना हुआ है — क्योंकि इसे साफ करना, ट्रैक करना और पुनः प्रयोग करना आसान होता है।

भारत बनाम अन्य देशों की रेलवे में बेडरोल रंग और उपयोग तालिका

Bedroles Colour

विशेष बिंदु:

  • भारत: सफेद रंग में गंदगी जल्दी नज़र आती है जिससे गुणवत्ता में पारदर्शिता बनी रहती है।
  • विदेशों में: रंगीन बेडरोल का प्रयोग अधिक सौंदर्यशास्त्र और ब्रांडिंग के लिए किया जाता है।
  • जापान: बेडरोल सिस्टम लगभग नहीं है; सफाई की प्रक्रिया अलग और बहुत सघन होती है।

इससे पता चलता है कि हर देश के रेलवे अपने जलवायु, यात्रियों की पसंद और मेंटेनेंस क्षमता के अनुसार लिनेन के रंग चुनते हैं।


 

रेलवे के लिए सफेदी का अर्थ – भरोसे और विश्वसनीयता

सफेद रंग स्वच्छता, विश्वास और सादगी का प्रतीक माना जाता है। अस्पताल, होटल और अब रेलवे – तीनों क्षेत्रों में सफेदी इसलिए पसंद की जाती है क्योंकि यह मानसिक रूप से स्वच्छता का संदेश देती है।

रेलवे के लिए यह यात्रियों में यह संदेश देता है: “हम आपको स्वच्छ और सुरक्षित यात्रा देना चाहते हैं।”


 

भारतीय रेलवे में बेडरोल का पुनर्नवीनीकरण (Recycling)

Recycling of old bed sheet

क्या आप जानते हैं? रेलवे अब पुराने बेडशीट्स को रिटायर करने के बाद उनका उपयोग पोछे, परदे या बैग बनाने में करता है। इससे न केवल खर्च बचता है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद होता है। सफेद कपड़े को रंगने या दोबारा प्रयोग करने में आसानी होती है, जिससे पुनर्नवीनीकरण आसान बनता है।


 

 निष्कर्ष: सफेद क्यों, और हमेशा क्यों?

तो अगली बार जब आप ट्रेन के एसी कोच में सफेद चादर देखें, तो समझ जाएँ कि यह सिर्फ रंग नहीं, एक सिस्टम की सोच, एक भरोसा, और एक जिम्मेदारी का प्रतीक है। भारतीय रेलवे की सफेदी सिर्फ चादरों तक सीमित नहीं है, बल्कि साफ-सुथरी सेवा का वादा भी है।

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