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यात्रा तो शुरू करो, रास्ते मिल ही जायेंगें -- आर.पी.यादव

तुम्हारा हर एक दिन, एक जीवन के समतुल्य है -- आर.पी.यादव

सूर्यास्त होने तक मत रुको, चीजें तुम्हे त्यागने लगे, उससे पहले तुम्ही उन्हें त्याग दो -- रामधारी सिंह दिनकर

हर परिस्थिति में एक खुबसूरत स्थिति छुपी होती है --आर पी यादव

क्या यही जिन्दगी है ?

आजकल के कुछ सुविधा संपन्न बच्चों के दिनचर्या पर आधारित संदेशात्मक रचना .

क्या यही जिन्दगी है ?

क्या यही जिन्दगी है
 
सुबह यूँ जगना जैसे

जगना जरुरी न हो,
वक्त के साथ यूँ चलना
जैसे वक्त की कमी न हो
क्या यही जिन्दगी है  ?

दिन को रात समझना
जैसे सोना ही अपनी मंजिल हो
रातों को दिन में बदलना
जैसे जगना ही मजबूरी हो
क्या यही जिन्दगी है ?

नमक हलाली से दूर
नमक हरामी को अपनाना
हकीकत छोड़
ख़्वाबों में खो जाना
क्या यही जिन्दगी है ?

अपनी तारीफों के गीत
खुद ही गुनगुनाना
औरों के जीवन में
काटें बिछाना
क्या यही जिन्दगी है ?

           ★★★

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